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बेहतर सेहत के लिए खूब खाइए अमरूद

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा (लखनऊ) ने अमरूद की सीआईएसएच नाम से ललित, श्वेता, धवल और लालिमा प्रजातियां विकसित की हैं

सीजन अमरूद का है। फिलहाल हर छोटे-बड़े चौराहे पर यह उपलब्ध है और बाकी सभी सीजनल फलों पर भारी भी। इसके औषधीय महत्व के मद्देनजर इसे खूब खाइए और लगाइए भी। बेहतर प्रबंधन के जरिए यह आसानी से बड़े गमले में आपके किचन गार्डेन का हिस्सा बन सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन की सरकार, सबकी आरोग्यता और इलाज के लिए प्रतिबद्ध है। किचन गार्डेन, औषधीय वाटिका, पौधरोपण के दौरान स्वास्थ्य के लिए पावरहाउस कहे जाने वाले सहजन जैसे पौधों को प्रोत्साहन, सबके सस्ते और अद्यतन इलाज के लिए आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य मेला, वेलनेस सेंटर, हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज, उपलब्ध चिकित्सा संस्थानों का उच्चीकरण जैसी योजनाएं और आसानी से अपने स्वास्थ्य की जांच के लिए जगह जगह स्थापित किए जाने वाले हेल्थ एटीएम इसके प्रमाण हैं। बढ़ती आय और शिक्षा के कारण लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी हुए हैं। वैश्विक महामारी कोरोना के बाद तो और भी। ऐसे में अमरूद जैसे मौसमी फल आपकी सेहत में मददगार हो सकते हैं।

बेहतर फलत वाली प्रजातियां

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबद्ध केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा (लखनऊ) ने अमरूद की सीआईएसएच नाम से ललित, श्वेता, धवल और लालिमा प्रजातियां विकसित की हैं। इनके फल परंपरागत रूप से प्रचलित प्रजातियों से बड़े होते हैं। स्वाद और मिठास में बेहतर होने के नाते इनका बाजार भाव भी अच्छा मिल जाता है। इनके पौधे संस्थान की पौधशाला में विक्रय के लिए उपलब्ध भी हैं।

संस्थान की ओर से विकसित प्रजातियों की खूबी

ललित
इस प्रजाति के फल भीतर से गुलाबी एवं बाहर से आकर्षक लाल आभायुक्त केसरिया पीले रंग के होते हैं। फल का गूदा सख्त एवं शर्करा एवं अम्ल के उचित अनुपात के साथ ही गुलाबी रंग का होता है। ताजे उपभोग एवं परिरक्षण दोनों की ही दृष्टि से यह किस्म उत्तम पायी गयी है। इसके गूदे का गुलाबी रंग परिरक्षण के बाद भी एक वर्ष तक बना रहता है। यह किस्म अमरूद की लोकप्रिय किस्म इलाहाबाद सफेदा की अपेक्षा औसतन 24 प्रतिशत अधिक उपज देती है। इन्हीं गुणों के कारण यह प्रजाति व्यावसायिक खेती के लिए मुफीद है।

श्वेता

यह एप्पल कलर किस्म के बीजू पौधों से चयनित खूब फलत देने वाली किस्म है। वृक्ष मध्यम आकार का होता है। फल थोड़े गोल होते हैं। बीज मुलायम होता है। फलों का औसत आकार करीब 225 ग्राम होता है। बेहतर प्रबंधन से प्रति पेड़ प्रति सीजन करीब 90 किग्रा फल प्राप्त होते हैं।
धवल
यह प्रजाति इलाहाबाद सफेदा से भी लगभग 20 फीसद से अधिक फलत देती है। फल गोल, चिकने एवं मध्यम आकार (200-250 ग्राम) के होते हैं। पकने पर फलों का रंग हल्का पीला और गूदा सफेद, मृदु सुवासयुक्त मीठा होता है। बीज भी अपेक्षाकृत खाने में मुलायम होता है।

लालिमा
यह एप्पल ग्वावा से चयनित किस्म है। फलों का रंग लाल होता है। प्रति फल औसत वजन 190 ग्राम होता है। फलत भी अच्छी होती है।

हर तरह की भूमि पर लगाए जा सकते अमरूद के बाग
अमरूद के बाग किसी भी तरह की भूमि पर लगाए जा सकते हैं। उचित जलनिकास वाली बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए उपयुक्त है। पौधरोपण करते समय पौध से पौध और लाइन से लाइन की मानक दूरी 5 से 6 मीटर रखें। पौधों के बड़े होने तक चार पांच साल तक इसमें सीजन के अनुसार इंटर क्रॉपिंग भी कर सकते हैं। अगर सघन बागवानी करनी है तो यह दूरी दूरी आधी कर दें। इसमें प्रबंधन और फसल संरक्षण पर ध्यान देने से पौधों की संख्या के अनुसार उपज भी अधिक मिलती है। करीब 20 साल बाद फलत कम होने लगती है। जो फल आते हैं उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। कैनोपी प्रबंधन द्वारा इन बागों का कायाकल्प संभव है।

ताकि जाड़े में आएं अधिक फल

जाड़े में मिलने वाले अमरूद के फल अपेक्षाकृत बेहतर गुणवत्ता के होते हैं। मांग अच्छी होने से दाम भी अच्छे मिलते हैं। अगर आप जाड़े में अधिक फल चाहते हैं तो मार्च अप्रैल में आने वाले फूल को शाखाओं सहित निकाल दें। इससे जाड़े की फलत और फलों की गुणवत्ता बेहतर हो जाएगी। रोपण का उचित समय जुलाई अगस्त है। सिंचाई का साधन उपलब्ध होने पर फरवरी में भी पौधे लगा सकते हैं।

खनिज, विटामिंस और रेशा से भरपूर

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक टी. दामोदरन के अनुसार अपने खास स्वाद और सुगंध के अलावा विटामिन सी से भरपूर अमरूद में शर्करा, पेक्टिन भी होता है। साथ ही इसमें खनिज, विटामिंस और रेशा भी मिलता है। इसीलिए इसे अमृत फल और गरीबों का सेव भी कहते हैं। ताजे फलों के सेवन के अलावा प्रोसेसिंग कर इसकी चटनी, जेली, जेम, जूस और मुरब्बा आदि भी बना सकते हैं।

प्रति 100 ग्राम अमरूद में मिलने वाले पोषक तत्व
नमी 81.7
फाइबर 5.2
कार्बोज 11.2
प्रोटीन 0.9
वसा 0.3
इसके अलावा इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, आयरन आदि भी उपलब्ध होते हैं।
बेहतर आय के लिए आम के साथ लगाएं अमरूद
संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुशील शुक्ला के अनुसार बेहतर आय के लिए आम के साथ अमरूद के भी बाग लगा सकते हैं। इसके लिए आम के पौधों की पौध से पौध और लाइन से लाइन की दूरी 10 मीटर रखें। दो पौधों और लाइन से लाइन के बीच 55 मीटर पर अमरूद के पौधे लगाएं। इससे अमरूद के काफी पौधे लग जाएंगे। इससे बागवानों को बेहतर और अधिक समय तक आय होगी।


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