केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने यूपी को सीवरेज प्रबंधन समेत अन्य 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में प्रदेश की नदियों का पुनरुद्धार करने व उसे स्वच्छ करने के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है। इसी का नतीजा है कि केंद्रीय सरकार भी योगी सरकार के इन प्रयासों को बल दे रही है। केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने यूपी को सीवरेज प्रबंधन समेत अन्य 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके तहत वाराणसी में अस्सी नाले की टैपिंग की जाएगी। वहीं वृंदावन में एसटीपी का निर्माण समेत इंटरसेप्शन और डायवर्जन नेटवर्क का काम होगा, जबकि मथुरा के कोसी कलां में एसटीपी के साथ छाता में इंटरसेप्शन और डायवर्जन नेटवर्क को बिछाया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के चार जिलों हापुड़, बुलंदशहर, बदायूं और मिर्जापुर में जैव विविधता पार्कों की स्थापना की एक बड़ी परियोजना को भी मंज़ूरी दी गई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में नदियों को स्वच्छ रखने की मुहिम को प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इसके दृष्टिगत स्वच्छता के अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से 8 परियोजनाओं की मंजूरी इसी दिशा में उठाया गया अहम कदम है।

साढ़े चार सौ करोड़ से एसटीपी, इंटरसेप्शन, डायवर्जन और आई एंड डी नेटवर्क का होगा काम
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की कार्यकारी समिति की 45वीं बैठक में सीवरेज प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश में कुल 4 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें वाराणसी में अस्सी नाले की टैपिंग के लिए 55 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण भी शामिल है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत कुल 308.09 करोड़ रुपए है। वाराणसी की परियोजना का उद्देश्य तीन नालों अस्सी, सामने घाट और नखी से जीरो अनट्रीटेड डिस्चार्ज का लक्ष्य हासिल करना है। अन्य परियोजनाओं में 13 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण, मौजूदा संरचनाओं का नवीनीकरण शामिल हैं। वृंदावन में 77.70 करोड़ रुपये की लागत से 12 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण और इंटरसेप्शन और डायवर्जन नेटवर्क बिछाना भी शामिल है। वहीं, मथुरा के कोसी कलां में 66.59 करोड़ की लागत से 6 एमएलडी का एसटीपी जबकि छाता में आई एंड डी नेटवर्क आदि बिछाना शामिल है। मथुरा-वृंदावन की इन परियोजनाओं में क्रमशः 2, 1 और 11 नालों को इंटरसेप्ट और डायवर्ट करने की परिकल्पना की गई है, जो कोसी नाले में गिरकर यमुना नदी को प्रदूषित करते हैं। इन सभी परियोजनाओं में 15 वर्षों के लिए परिसंपत्तियों का संचालन और रखरखाव भी शामिल है।

चार जैव विविधता पार्कों की होगी स्थापना
प्रदेश के चार जिलों हापुड़, बुलंदशहर, बदायूं और मिर्जापुर में चार जैव विविधता पार्कों की स्थापना की एक बड़ी परियोजना को भी मंज़ूरी दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत 24.97 करोड़ रुपये है। इनके नाम मिर्जापुर में मोहनपुर जैव विविधता पार्क, बुलंदशहर में रामघाट जैव विविधता पार्क, हापुड़ में आलमगीरपुर जैव विविधता पार्क और बदायूं में उझानी जैव विविधता पार्क हैं। ये सभी चार स्थान गंगा के बाढ़ के मैदानों पर स्थित हैं। प्रस्तावित पार्क गंगा के बाढ़ के मैदानों के साथ आरक्षित वनों का हिस्सा हैं और नदी के कायाकल्प और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जैव विविधता पार्क देशी पौधों और जानवरों की प्रजातियों के संयोजन के साथ जंगल को अनूठा परिदृश्य प्रदान करेंगे, जो एक क्षेत्र में बनाए गए आत्मनिर्भर जैविक समुदायों का निर्माण करेंगे। गंगा जैव विविधता पार्कों के समग्र परिणाम से पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, जैव विविधता और बेसिन पैमाने पर गंगा नदी के कायाकल्प को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

जौनपुर में घाट को किया जाएगा विकसित
रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के लिए प्रदेश के जौनपुर में 5.07 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक घाट विकास परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। जिस स्थान पर यह परियोजना प्रस्तावित है वह एक पवित्र स्थान है, जो गंगा की सहायक गोमती नदी से संबद्ध है। यह जनता की आस्था का केंद्र है। परियोजना में हनुमान घाट को सद्भावना पुल से जोड़ने वाली 4 मीटर चौड़ी पैदल यात्रा का पथ, घाट, भू निर्माण, शौचालय ब्लॉक आदि का निर्माण शामिल है।

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